उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने 17 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की आलोचना करते हुए संसद की सर्वोच्चता पर जोर दिया। उन्होंने तमिलनाडु मामले में कोर्ट के उस निर्णय को ‘न्यायिक अतिक्रमण’ करार दिया, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपालों को विधायिका द्वारा दोबारा पारित विधेयकों पर तीन महीने में निर्णय लेने की समयसीमा दी गई थी।
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